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	<title>naukrani ki chudai Archives - Hindi Sex stories</title>
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	<title>naukrani ki chudai Archives - Hindi Sex stories</title>
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	<item>
		<title>मेरी नौकरानी और मेरी अन्तर्वासना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[देसी बहु]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Feb 2021 09:27:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Antarvasna]]></category>
		<category><![CDATA[antarvasna hindi]]></category>
		<category><![CDATA[chudai kahani]]></category>
		<category><![CDATA[maid servant sex stories]]></category>
		<category><![CDATA[naukrani ki chudai]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हेल्लो दोस्तों, मैं दीपक हाजिर हूँ कहानी का दूसरा भाग लेकर &#124; आशा है आप लोगों को कहानी का पहला भाग पसंद आया होगा &#124; जिन दोस्तों ने पहला भाग नही पढा उनको बताना चाहूँगा ... <a title="मेरी नौकरानी और मेरी अन्तर्वासना" class="read-more" href="https://freehindisexstories.net/naukrani-ki-antarvasna-chudai/" aria-label="Read more about मेरी नौकरानी और मेरी अन्तर्वासना">(कहानी पढ़िए)</a></p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हेल्लो दोस्तों, मैं दीपक हाजिर हूँ कहानी का दूसरा भाग लेकर | आशा है आप लोगों को कहानी का पहला भाग पसंद आया होगा | जिन दोस्तों ने पहला भाग नही पढा उनको बताना चाहूँगा की ये कहानी मेरी नौकरानी फातिमा की चुदाई की है | पहले भाग में मैंने बताया था की कैसे मैंने उसको उत्तेजित किया और किस करते करते उसके बूब्स पर पहुँच गया | इस भाग में मैं आप लोगों को आगे की कहानी बताऊंगा | <span style="color: #ffffff;">naukrani ki antarvasna chudai</span></p>
<p>दोस्तों मैं और फातिमा दोनों बेड पर थे और मैं उसके निप्पल चूस रहा था | <span style="color: #ffffff;">naukrani ki antarvasna chudai</span></p>
<p>निप्पल चूसते चूसते मैंने उसकी चूत में अपनी एक ऊँगली डाल दी | उसकी चूत झांटों भरी थी और पूरी तरह गीली थी | मेरी ऊँगली आराम से उसकी चूत में घुस गयी | वो सिसकियाँ लेने लगी | अब मैंने उसकी चूत में ऊँगली को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया | वो मदहोश होकर आःह्ह्ह हह ह हह ह हह ह ह ह्ह्ह्हह हह ह ह्ह्ह्ह ह ह्ह्ह ह्ह्ह्ह ह ह हह ह ऊऊ उ उ ऊ उ ऊ ऊऊ उई इ इ इ ई इ इ इ ईई इ ई इ इ ई ईई इ इ ई इ इ ई इ ई इ ई इ ई इ इ इ इ ईईइ ईईईइ ईईई करने लगी | मैंने अब उसकी चूत में दो उँगलियाँ डाल दी | अब वो और जोर जोर से सिसकियाँ लेने लगी |</p>
<p>मैंने उसको किस भी किये जा रहा था | <span style="color: #ffffff;">naukrani ki antarvasna chudai</span></p>
<p>थोड़ी देर तक ऐसे ही करने के बाद मैंने उसके हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया और लेट गया | वो मेरा इशारा समझ गयी और मेरे ऊपर आ गयी | वो मेरे लंड को बड़े मजेदार तरीके से सहलाने लगी | फिर उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लिया और किस किया | दोस्तों उस किस में ही मुझे भरपूर मजा आ गया | अब वो मुझे और उत्तेजित कर रही थी | वो मेरे लंड को टोपे को बड़े प्यार से चूम रही थी | मुझे जोश चढ़ रहा था | मेरा लंड अब पूरा खड़ा हो गया और 7 इंच का हो गया | अब वो मेरे लंड को चूसने लगी और बड़े प्यार से अन्दर बाहर करने लगी | मुझे जन्नत की सैर करने जैसा मजा आ रहा था उस टाइम | मैंने उसके सर को पकड़ा और अपने लंड से उसके मुंह हो चोदने लगा | कई बार तो मैंने अपना लंड उसके मुंह में इतना अन्दर तक घुसेड दिया की उसे खांसी आ गयी |</p>
<p><a href="https://hindipornstories.org/">Antarvasna</a> &#8211; <a href="https://freehindisexstories.net/%e0%a4%95%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%9c-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%ab%e0%a5%87%e0%a4%b8%e0%a4%b0-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a8/">कॉलेज प्रोफेसर और मेरी अन्तर्वासना</a></p>
<p>मैंने अब झडने वाला था लेकिन मैंने उसे बताया नही क्यूंकि मैं उसके मुंह में झाड़ना चाहता था | थोड़ी देर तक ऐसे ही लंड चुस्वाने के बाद मैं झड गया और अपना सारा माल उसके मुंह में छोड़ दिया |</p>
<p>वो सारा माल निगली तो नही लेकिन गुस्सा भी नही हुई | <span style="color: #ffffff;">naukrani ki antarvasna chudai</span></p>
<p>अब मैंने उसको लिटाया और उसके बूब्स को चूसने लगा | बूब्स को चूसते चूसते उसकी चूत में ऊँगली भी करने लगा | उसकी चूत झांटों वाली थी इसीलिए मेरा चूत चाटने का मन नही हुआ | मैंने उसकी चूत को अपनी उँगलियों से चोदना शुरू कर दिया | उसकी मादक सिसकियाँ सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया फिर से | वो भी और इंतजार नही करना चाहती थी | मैंने अब बिना देर किये उसकी टांगों को फैलाया और उसमे अपना 7 इंच का लंड घुसेड़ना शुरू कर दिया | जैसे ही मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत में डाला, वो चीख पड़ी | उसकी चूत काफी टाइट थी | मैंने थोड़ी देर इंतजार किया और फिर एक और झटका दिया | इस बार मेरे लंड का आधा हिस्सा उसकी चूत के अन्दर था | उसकी आँखों से आंसू आ गये | मैंने उसे किस करना शुरू कर दिया ताकि उसे थोडा नार्मल लगे | थोड़ी देर बाद मैंने और जोर से धक्का लगाया और इस बार पूरा लंड घुसेड दिया | वो रो पड़ी | मैंने उसको दिलासा दिलाया और उसे नार्मल किया |</p>
<p>अब वो रोना बंद कर चुकी थी | <span style="color: #ffffff;">naukrani ki antarvasna chudai</span></p>
<p>मैंने अब धीरे धीरे उसकी चूत में अपना लंड अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया | अब वो भी मजे लेने लगी | मैंने धक्कों की स्पीड तेज कर दी | वो मजे लेटी हुई आआआह्ह्ह्ह ह हह ह ह्ह्ह ह ह हह ह ह हह ह हह ह ह्ह्ह हह हह ह्ह्ह्ह ह ह्ह्ह्हह ह ह हह ह हह ह  ऊ ऊ ऊऊ उ ऊ उ ऊऊउ उ उ ऊ उ उ ऊऊउ ऊ उ उ उ ई इ ई इ इ इ ई इ ईईईइ ईईईई ईईइ इ इ इ आह्ह्ह ह ह ह हह ह ह ह हह ह ह्ह्ह्ह ह ह हह हह हह ह हह ह ह ह हह ह ह ह हह ह ह ह ह्ह्ह्ह हह करने लगी | मैंने उसे चोदना जरी रखा और साथ ही साथ उसे किस भी करने लगा |</p>
<p>थोड़ी देर तक ऐसे ही चोदने के बाद मैंने उसे घोड़ी बनाया और उसकी चूत में अपना लंड पेल दिया | अब वो पूरी तरह गर्म हो चुकी थी | चुद्वाते हुए वो बोलने लगी आःह्ह हह ह हह ह हह ह ह ऊऊऊ उ ऊ उ ऊ उ उ ऊ ऊ उ चोदो मुझे आःह्ह ह हह ह ह ह्ह्ह हह ह ह ह ह हह ह और जोर से चोदो ओ आःह्ह्ह ह ह ह ई इ ओई इ ऊऊऊउइ ई इ ई इ इ ई इ ई इ इ ई इ ईईइ इ इ ई इ ई इ ईई ई ई इ इ ई इ ई इ ईई ईईइ ईईईई इ इ इ ई इ इ ई इ इ इ ईईइ मजा आ रहा रहा है.. बुझा दो मेरी प्यास…. आःह ह हह ह ह हह ह ह.. चोदो मुझे.., आह्ह्ह | मुझे उसकी सिसकियाँ सुन कर और जोश आ रहा था और मैंने अपने धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी |</p>
<p>लगभग बीस मिनट की चुदाई के बाद जब मैंने झडने वाला हुआ तो वो बोली की मेरी चूत में ही छोड़ दो, मैं दवा खा लुंगी | मैंने बोला ठीक है | मैंने जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया | थोड़ी देर बाद मैं उसकी चूत में झड गया |</p>
<p>हम दोनों को इस चुदाई में बहुत मजा आया | <span style="color: #ffffff;">naukrani ki antarvasna chudai</span></p>
<p>उस दिन के बाद से जब तक मैं दिल्ली में था, हम दोनों ने बहुत बार चुदाई की और मजे लिए | आशा है की आप लोगों को ये कहानी पसंद आई होगी |</p>
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			</item>
		<item>
		<title>आशा का नशा</title>
		<link>https://freehindisexstories.net/asha-ka-nasha/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[देसी बहु]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Apr 2020 05:17:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[नौकर-नौकरानी]]></category>
		<category><![CDATA[पहली बार चुदाई]]></category>
		<category><![CDATA[antarvasna]]></category>
		<category><![CDATA[desi chudai kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आसाम की हरी भरी वादियां और जवान दिलों का संगम… किसको लुभा नहीं लेगा। ऐसे ही आसाम की हरी भरी जगह पर मेरे पति का पद्स्थापन हुआ। हम दोनों ऐसी जगह पर बहुत खुश थे। ... <a title="आशा का नशा" class="read-more" href="https://freehindisexstories.net/asha-ka-nasha/" aria-label="Read more about आशा का नशा">(कहानी पढ़िए)</a></p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आसाम की हरी भरी वादियां और जवान दिलों का संगम… किसको लुभा नहीं लेगा। ऐसे ही आसाम की हरी भरी जगह पर मेरे पति का पद्स्थापन हुआ। हम दोनों ऐसी जगह पर बहुत खुश थे। हमे कम्पनी की तरफ़ से कोई घर नहीं मिला था, इसलिये हमने थोड़ी ही दूर पर एक मकान किराये पर ले लिया था… उसका किराया हमें कम्पनी की तरफ़ से ही मिलता था। मेरे पति सुनील की ड्यूटी शिफ़्ट में लगती थी। घर में काम करने के लिये हमने एक नौकरानी रख ली थी। उसका नाम आशा था। उसकी उम्र लगभग 20 साल होगी। भरपूर जवान, सुन्दर, सेक्सी फ़िगर… बदन पर जवानी की लुनाई … चिकनापन … झलकता था।</p>
<p>सुनील तो पहले दिन से ही उस पर फ़िदा था। मुझसे अक्सर वो उसकी तारीफ़ करता रहता था। मैं उसके दिल की बात अच्छी तरह समझती थी। सुनील की नजरें अक्सर उसके बदन का मुआयना करती रहती थी… शायद अन्दर तक का अहसास करती थी। मैं भी उसकी जवानी देख कर चकित थी। उसके उभार छोटे छोटे पर नुकीले थे। उसके होठं पतले लेकिन फ़ूल की पन्खुडियों जैसे थे।</p>
<p><strong>Antarvasna Hindi sex stories &#8211; <a class="yoast-link-suggestion__value" href="https://hindipornstories.org/office-me-madhuri-ki-choda/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">ऑफिस में माधुरी को चोदा</a></strong></p>
<p>एक दिन सुनील ने रात को चुदाई के समय मुझे अपने दिल की बात बता ही दी। उसने कहा -”नेहा… आशा कितनी सेक्सी है ना…”</p>
<p>“हं आ… हां… है तो …… जवान लडकियां तो सेक्सी होती ही है…” मैं उसका मतलब समझ रही थी।</p>
<p>“उसका बदन देखा … उसे देख कर तो… यार मन मचल जाता है……” सुनील ने कुछ अपना मतलब साधते हुए कहा।</p>
<p>“अच्छा जी… बता भी दो जानू… जी क्या करता है……” मैं हंस पड़ी… मुझे पता था वो क्या कहेगा…</p>
<p>“सुनो नेहा … उसे पटाओ ना … उसे चोदने का मन करता है…”</p>
<p>“हाय… नौकरानी को चोदोगे … पर हां …वो चीज़ तो चोदने जैसी तो है…”</p>
<p>“तो बोलो … मेरी मदद करोगी ना …”</p>
<p>“चलो यार …तुम भी क्या याद करोगे … कल से ही उसे पानी पानी करती हूं……”</p>
<p>फिर मै सोच में पड़ गयी कि क्या तरीका निकाला जाये। सेक्स तो सभी की कमजोरी होती ही है। मुझे एक तरकीब समझ में आयी।<br />
दूसरे दिन आशा के आने का समय हो रहा था……</p>
<p>मैने अपने टीवी पर एक ब्ल्यू हिन्दी फ़िल्म लगा दी। उस फ़िल्म में चुदाई के साथ हिन्दी डायलोग भी थे। आशा कमरे में सफ़ाई करने आयी तो मै बाथरूम में चली गयी। सफ़ाई करने के लिये जैसे ही वो कमरे के अन्दर आयी तो उसकी नजर टीवी पर पडी… चुदाई के सीन देख कर वो खडी रह गयी। और सीन देखती रही।</p>
<p><strong>Antarvasna Hindi sex stories &#8211; <a class="yoast-link-suggestion__value" href="https://hindipornstories.org/pados-wali-bhabhi-ki-chudai/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">पडोस की सेक्सी भाभी</a></strong></p>
<p>मैं बाथरूम से सब देख रही थी। उसे मेरा वीडियो प्लेयर नजर नहीं आया क्योंकि वह लकडी के केस में था। वो धीरे से बिस्तर पर बैठ गयी। उसे पिक्चर देख कर मजा आने लग गया था। चूत में लन्ड जाता देख कर उसे और भी अधिक मजा आ रहा था। धीरे धीरे उसका हाथ अब उसके स्तनो पर आ गया था.. वह गरम हो रही थी। मेरी तरकीब सटीक बैठी। मैने मौका उचित समझा और बथरूम से बाहर आ गयी…</p>
<p>“अरे… टीवी पर ये क्या आने लगा है…”</p>
<p>“दीदी… साब तो है नहीं…चलने दो ना…अपन ही तो है…”</p>
<p>“अरे नहीं आशा… इसे देख कर दिल में कुछ होने लगता है…” मैं मुस्करा कर बोली</p>
<p>मैने चैनल बदल दिया… आशा के दिल में हलचल मच गयी थी … उसके जवान जिस्म में वासना ने जन्म ले लिया था।</p>
<p>“दीदी… ये किस चेनल से आता है …”उसकी उत्सुकता बढ रही थी।</p>
<p>“अरे तुझे देखना है ना तो दिन को फ़्री हो कर आना … फिर अपन दोनो देखेंगे… ठीक है ना…”</p>
<p>“हां दीदी…तुम कितनी अच्छी हो…” उसने मुझे जोश में आकर प्यार कर लिया। मैं रोमांचित हो उठी… आज उसके चुम्बन में सेक्स था। उसने अपना काम जल्दी से निपटा लिया… और चली गयी। तीर निशाने पर लग चुका था।</p>
<p>करीब दिन को एक बजे आशा वापस आ गयी। मैने उसे प्यार से बिस्तर पर बैठाया और नीचे से केस खोल कर प्लेयर में सीडी लगा दी और मैं भी बिस्तर पर बैठ गयी। ये दूसरी फ़िल्म थी। फ़िल्म शुरू हो चुकी थी। मैं आशा के चेहरे का रंग बदलते देख रही थी। उसकी आंखो में वासना के डोरे आ रहे थे। मैने थोडा और इन्तजार किया… चुदाई के सीन चल रहे थे।</p>
<p>मेरे शरीर में भी वासना जाग उठी थी। आशा का बदन भी रह रह कर सिहर उठता था। मैने अब धीरे से उसकी पीठ पर हाथ रखा। उसकी धडकने तक महसूस हो रही थी। मैने उसकी पीठ सहलानी चालू कर दी। मैने उसे हल्के से अपनी ओर खींचने की कोशिश की… तो वो मेरे से सट गयी। उसका कसा हुआ बदन…उसकी बदन की खुशबू… मुझे महसूस होने लगी थी। टीवी पर शानदार चुदाई का सीन चल रहा था। आशा का पल्लू उसके सीने से नीचे गिर चुका था… मैने धीरे से उसके स्तनों पर हाथ रख दिया… उसने मेरा हाथ स्तनों के ऊपर ही दबा दिया। और सिसक पडी।</p>
<p><strong>Antarvasna Hindi sex stories &#8211; <a class="yoast-link-suggestion__value" href="https://hindipornstories.org/mera-pehla-sex-anubhav/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">मेरा पहला सेक्स अनुभव</a></strong></p>
<p>“आशा… कैसा लग रहा है…”</p>
<p>“दीदी… बहुत ही अच्छा लग रहा है…कितना मजा आ रहा है…” कहते हुए उसने मेरी तरफ़ देखा … मैने उसकी चूंचियां सहलानी शुरू कर दी… उसने मेरा हाथ पकड लिया…</p>
<p>“बस दीदी… अब नहीं …”</p>
<p>“अरे मजे ले ले … ऐसे मौके बार बार नहीं आते……” मैने उसके थरथराते होंठों पर अपने होंठ रख दिये… आशा उत्तेजना से भरी हुयी थी। आशा ने मेरे स्तनों को अपने हाथों में भर लिया और धीरे धीरे दबाने लगी। मैने उसका लहंगा ऊपर उठा दिया… और उसकी चिकनी जांघों पर हाथ से सहलाने लगी… अब मेरे हाथ उसकी चूत पर आ चुके थे। चूत चिकनाई और पानी छोड रही थी। मेरे हाथ लगाते ही आशा मेरे से लिपट गयी। मुझे लगा मेरा काम हो गया।</p>
<p>“दीदी… हाय… नहीं करो ना … मां…री… कैसा लग रहा है…”</p>
<p>मैने उसकी चूत के दाने को हल्के हल्के से हिलाने लगी…। वो नीचे झुकती जा रही थी… उसकी आंखे नशे में बन्द हो रही थी।</p>
<p>उधर सुनील लन्च पर आ चुका था। उसने अन्दर कमरे में झांक कर देखा। मैने उसे इशारा किया कि अभी रुको। मैने आशा को और उत्तेजित करने के लिये उससे कहा – “आशा … आ मैं तेरा बदन सहला दूं…… कपड़े उतार दे …”</p>
<p>“दीदी … ऊपर से ही मेर बदन दबा दो ना…” वो बिस्तर पर लेट गयी। मैं उसके उभारों को दबाती रही…उसकी सिसकियां बढती रही… मैने अब उसकी उत्तेजना देख कर उसका ब्लाऊज उतार दिया… उसने कुछ नहीं कहा… मैने भी यह देख कर अपने कपडे तुरन्त उतार दिये। अब मैं उसकी चूत पर अपनी उंगली से दबा कर सहलाने लगी… और धीरे से एक उंगली उसकी चूत में डाल दी। उसके मुख से आनन्द की सिसकारी निकल पड़ी…</p>
<p>“आशा … हाय कितना मजा आ रहा है… है ना…”</p>
<p>“हां दीदी… हाय रे… मैं मर गयी…”</p>
<p><strong>Antarvasna Hindi sex stories &#8211; <a class="yoast-link-suggestion__value" href="https://hindipornstories.org/dost-ki-girlfriend-ko-patakar-choda/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">दोस्त की गर्लफ्रेंड को पटाकर चोदा</a></strong></p>
<p>“लन्ड से चुदोगी आशा… मजा आयेगा…”</p>
<p>“कैसे दीदी … लन्ड कहां से लाओगी…”</p>
<p>“कहो तो सुनील को बुला दूं … तुम्हे चोद कर मस्त कर देगा”</p>
<p>“नहीं …नहीं … साब से नहीं …”</p>
<p>“अच्छा उल्टी लेट जाओ … अब पीछे से तुम्हारे चूतड़ भी मसल दूं…”</p>
<p>वो उल्टी लेट गयी। मैने उसकी चूत के नीचे तकिया लगा दिया। और उसकी गान्ड ऊपर कर दी। अब मैने उसके दोनो पैर चौड़ा दिये और उसके गान्ड के छेद पर और उसके आस पास सहलाने लगी। वो आनन्द से सिसकारियां भरने लगी।</p>
<p>सुनील दरवाजे के पास खडा हुआ सब देख रहा था। उसने अपने कपड़े भी उतार लिये। ये सब कुछ देख कर सुनील का लन्ड टाईट हो चुका था। उसने अपना लन्ड पर उंगलियों से चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगा। मैं आशा की गान्ड और चूतडों को प्यार से सहला रही थी। उसकी उत्तेजना बहुत बढ चुकी थी। मैने सुनील को इशारा कर दिया… कि लोहा गरम है…… आ जाओ…।</p>
<p>सुनील दबे पांव अन्दर आ गया। मैने इशारा किया कि अब चोद डालो इसे। उसके फ़ैले हुये पांव और खुली हुयी चूत सुनील को नजर आ रही थी। ये देख कर उसका लन्ड और भी तन्नाने लगा । सुनील उसकी पैरों के बीच में आ गया। मैं आशा के पीछे आ गयी… सुनील ने आशा के चूतडों के पास आकर लन्ड को उसकी चूत पर रख दिया। आशा को तुरन्त ही होश आया…पर तब तक देर हो चुकी थी। सुनील ने उस काबू पा लिया था। वो उसके चूतडों से नीचे लन्ड चूत पर अड़ा चुका था। उसके हाथों और शरीर को अपने हाथों में कस चुका था।</p>
<p>आशा चीख उठी…पर तब तक सुनील का हाथ उसका मुँह दबा चुका था। मैने तुरन्त ही सुनील का लन्ड का निशाना उसकी चूत पर साध दिया। सुनील हरकत में आ गया।</p>
<p>उसका लन्ड चूत को चीरता हुआ अन्दर घुस गया। चूत गीली थी…चिकनी थी पर अभी तक चुदी नहीं थी। दूसरे ही धक्के में लन्ड गहराई में उतरता चला गया। आशा की आंखे फ़टी पड़ रही थी। घू घू की आवाजें निकल रही थी। उसने अपने हाथों से जोर लगा कर मेरा हाथ अपने मुह से हटा लिया। और जोर से रो पडी… उसकी आंखो से आंसू निकल रहे थे… चूत से खून टपकने लगा था।</p>
<p><strong>Antarvasna Hindi sex stories &#8211; <a class="yoast-link-suggestion__value" href="https://hindipornstories.org/sardi-ki-raat-aunty-ki-chudai/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">सरदी की रात आंटी के साथ</a></strong></p>
<p>“बाबूजी … छोड दो मुझे… मत करो ये……” उसने विनती भरे स्वर में रोते हुये कहा। पर लन्ड अपना काम कर चुका था।</p>
<p>“बस…बस… अभी सब ठीक हो जायेगा… रो मत…” मैने उसे प्यार से समझाया।</p>
<p>“नहीं बस… छोड़ दो अब … मैं तो बरबाद हो गयी दीदी… आपने ये क्या कर दिया…” वो नीचे दबी हुयी छटपटाती रही। हम दोनों ने मिलकर उसे दबोच लिया। दबी चीखें उसके मुह से निकलती रही। सुनील ने लन्ड को धीरे धीरे से अन्दर बाहर करना शुरु कर दिया।</p>
<p>“साब…छोड़ दो ना … मैं तो बरबाद हो गयी…… हाऽऽऽय…” वो रो रो कर… विनती करती रही। सुनील ने अब उसकी चूंचियां भी भींच ली। वो हाय हाय करके रोती रही …नीचे से अपने बदन को छटपटाकर कर हिलाती कर निकलने की कोशिश करती रही। लेकिन वो सुनील के शरीर और हाथों में बुरी तरह से दबी थी। अन्तत: उसने कोशिश छोड दी और निढाल हो कर रोती रही।</p>
<p>सुनील ने अपनी चुदाई अब तेज कर दी … उसका कुंवारापन देख कर सुनील और भी उत्तेजित होता जा रहा था। धक्के तेजी पर आ गये थे। कुछ ही देर में आशा का रोना बन्द हो गया … और अन्दर ही अन्दर शायद उसे मस्ती चढने लगी…</p>
<p>“हाय मैं लुट गयी… मेरी इज़्ज़त चली गयी…।” बस आंखे बन्द करके यही बोलती जा रही थी… नीचे तकिया खून से सन गया था। अब सुनील ने उसकी चूंचियां फिर से पकड ली और उन्हे दबा दबा कर चोदने लगा। आशा अब चुप हो गयी थी… शायद वो समझ चुकी थी कि उसकी झिल्ली फ़ट चुकी है और अब बचने का भी कोई रास्ता नही है। पर अब उसके चेहरे से लग लग रहा था कि उसे मजा आ रहा है। मैने भी चैन की सांस ली…।</p>
<p>मैने देखा कि सुनील का लन्ड खून से लाल हो चुका था। उसकी कुँवारी चूत पहली बार चुद रही थी। उसकी टाईट चूत का असर ये हुआ कि सुनील जल्दी ही चरमसीमा पर पहुंच गया। अचानक नीचे से आशा की सिसकारी निकल पडी और वो झड़ने लगी। सुनील को लगा कि आशा को अन्तत: मजा आने लगा था और वो उसी कारण वो झड़ गयी थी।</p>
<p>अब सुनील ने अपना लन्ड बाहर निकाल लिया और अपनी पिचकारी छोड दी। सारा वीर्य आशा के चूतडों पर फ़ैलने लगा। मैने जल्दी से सारा वीर्य आशा की चूतडों पर फ़ैला दिया। सुनील अब शान्त हो चुका था।</p>
<p>सुनील बिस्तर से नीचे उतर आया। आशा को भी चुदने के बाद अब होश आया… वो वैसी ही लेटी हुई अब रोने लगी थी।</p>
<p>“बस अब तो हो गया … चुप हो जा…देख तेरी इच्छा भी तो पूरी हो गयी ना…”</p>
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<p>“दीदी… आपने मेरे साथ अच्छा नहीं किया… मैं अब कल से काम पर नहीं आऊंगी…” वो उठते हुये रोती हुई बोली… उसने अपने कपडे उठाये और पहनने लगी… सुनील भी कपडे पहन चुका था।</p>
<p>मैने सुनील को तुरन्त इशारा किया … वो समझ चुका था… जैसे ही आशा जाने को मुडी मैने उसे रोक लिया…”सुनो आशा… सुनील क्या कह रहा है……”</p>
<p>“आशा … मुझे माफ़ कर दो … देखो मुझसे रहा नही गया तुम्हे उस हालत में देख कर… प्लीज…”</p>
<p>“नहीं… नहीं साब… आपने तो मुझे बरबाद कर दिया है … मैं आपको कभी माफ़ नहीं करूंगी…” उसका चेहरा आंसुओं से तर था।</p>
<p>सुनील ने अपनी जेब से सौ सौ के दो नोट निकाल कर उसे दिये…पर उसने देख कर मुह फ़ेर लिया… उसने फिर और सौ सौ के पाँच नोट निकाल दिये… उसकी आंखो में एकबारगी चमक आ गयी… मैने तुरन्त उसे पहचान लिया। मैने सुनील के हाथ से नोट लिये और अपने पर्स से सौ सौ के कुल एक हज़ार रुपये निकाल कर उसके हाथ में पकड़ा दिये। उसका चेहरा खिल उठा।</p>
<p>“देख … ये साब ने गलती की ये उसका हरज़ाना है… हां अगर साब से और गलती करवाना हो तो इतने ही नोट और मिलेंगे…”</p>
<p>“दीदी … मैं आपकी आज से बहन हूं… मुझे पैसों की जरूरत किसे नहीं होती है…” मैने उसे आशा को गले लगा लिया…</p>
<p>“आशा …… माफ़ कर देना… तू सच में आज से मेरी बहन है… तेरी इच्छा हो … तभी ये करना…” आशा खुश हो कर जाने लगी…</p>
<p>दरवाजे से उसने एक बार फिर मुड़ कर देखा … फिर भाग कर आयी … और मेरे से लिपट गयी… और मेरे कान में कहा, “दीदी… साब से कहना … धन्यवाद…”</p>
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<p>” अब साब नहीं ! जीजाजी बोल ! और धन्यवाद किस लिये …… पैसों के लिये …”</p>
<p>” नहीं … मेरी चुदाई के लिये…”</p>
<p>वो मुड़ी और बाहर भाग गयी…… मैं उसे देखती रह गयी… तो क्या ये सब खेल खेल रही थी। मेरी नजर ज्योंही मेज़ पर पड़ी तो देखा कि सारे नोट वहीं पड़े हुए थे</p>
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