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	<title>jija saali sex stories Archives - Hindi Sex stories</title>
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	<title>jija saali sex stories Archives - Hindi Sex stories</title>
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		<title>साली के साथ जबरदस्त मज़ा किया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[देसी बहु]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Oct 2019 18:40:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीजा - साली]]></category>
		<category><![CDATA[antarvasna]]></category>
		<category><![CDATA[desi kahani]]></category>
		<category><![CDATA[gandi kahani]]></category>
		<category><![CDATA[ghar me chudai]]></category>
		<category><![CDATA[hindi chudai kahani]]></category>
		<category><![CDATA[hindi sex stories]]></category>
		<category><![CDATA[jija saali sex stories]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>तन के मिलन की चाह बडी नैसर्गिक है। सुन्दर स्त्री की देह से बढ़कर भ्रमित करने वाला और कुछ पदार्थ इस संसार में नहीं है। मेरे पिता ईसाई, माता हिन्दू ! मुझ पर हिन्दू संस्कारों ... <a title="साली के साथ जबरदस्त मज़ा किया" class="read-more" href="https://freehindisexstories.net/saali-ke-saath-mazedaar-sex/" aria-label="Read more about साली के साथ जबरदस्त मज़ा किया">(कहानी पढ़िए)</a></p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>तन के मिलन की चाह बडी नैसर्गिक है। सुन्दर स्त्री की देह से बढ़कर भ्रमित करने वाला और कुछ पदार्थ इस संसार में नहीं है। मेरे पिता ईसाई, माता हिन्दू ! मुझ पर हिन्दू संस्कारों की छाया अधिक पड़ी। मेरा विवाह मेरी मां की पसन्द के एक हिन्दू घराने में हुआ। पत्नी यौवन में नव दाम्पत्य के दिनों में सभी को बहुत भाती है और सर्वांग सुन्दरी लगती है।</p>
<p>कालांतर में मुझे दूसरी स्त्रियां भी आकर्षित करने लगी। विवाह के बाद दूसरी स्त्रियों से बात कर लेने में कोई शक़ भी नहीं करता है।</p>
<p>सुजाता, मेरी साली जी, अपनी शादी के बाद भी मुझसे मज़ाक करने में चूकती नहीं। वह मुझे बहुत भाती है। उसकी बातों की शैली कसमसाहट देती है। मुझे बहुत सतर्क रहना पड़ता है कि कहीं मेरा अपना दाम्पत्य जीवन भंग न हो जाये।</p>
<p>पिछले रविवार उसे किसी सिलसिले में मेरे शहर आना था। मैने सोचा कि चलो हल्की फुल्की चुहल होगी ! रस रहेगा !</p>
<p>मैं अपने साढू भाई से तो बातें करूंगा ही ! लेकिन असली आकर्षण सुजाता होगी !</p>
<p>वह शनिवार सांझ को ही सिर्फ अपने बेटे के साथ चली आई। साढू जी को अनायास कोई काम आ गया था। मुझे हर्षमिश्रित आश्चर्य हुआ।</p>
<p>मैं अपने आफिस के काम काज़ निपटा कर जब घर पहुंचा तो मुझे निराशा हुई कि वह मेरी पत्नी के साथ बातों में तल्लीन थी। मुझे सादर प्रणाम करने के अलावा उसने कोई खुशी नहीं दी। मैंने भी उसके और अपने बेटे को गिटार सुनाया और अकेले अपने कमरे में सो गया। नज़दीक़ी दूसरे कमरे में वे दोनों बहनें खिलखिला कर चटखारे लेकर बातें कर रही थी।</p>
<p>मुझे नींद नहीं आई। ज़ब वे सब सो गई, मैं सुजाता के ख्यालों में खो गया और निर्वस्त्र हो कर मूड्स कंडोम की चिकनाई के बीच तीव्र हस्तमैथुन करता रहा। मैने ख्यालों में उसको भरपूर भोगा। फिर एक दो घंटे की नींद के बाद जागने पर फिर से अनुभव दोहराया। रात में दो बार विसर्जन करके निढाल हो कर गहरी नींद में सो गया। सुजाता अब सिर्फ एक सपना थी।</p>
<p><strong>Jija saali sex stories &#8211; <a class="yoast-link-suggestion__value" href="https://freehindisexstories.net/chooto-ka-mela-aur-main-akela/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">चूतो का मेला और अकेला</a></strong></p>
<p>सुबह हल्की निराशा थी। लेकिन दरस की चाह तो पूरी होनी ही थी। आज उसे दिन भर यहीं रहना है यह सोच कर मन को सांत्वना दी। लेकिन रात में जो दो बार रस गिरा दिया तो अब और कुछ तो होगा नहीं : मौका भी तो नहीं। मैंने भी दिन में अपने मित्र के पास कुछ परामर्श के लिये समय लिया था सो जाने की योजना बना डाली और पत्नी को बता भी दी।</p>
<p>तभी स्थिति बदली और मेरी बड़ी बहन अचानक 8 बजे ऑटो से उतरी। वह राखी के सिलसिले में आई थी। आते ही उसने मेरी पत्नी से बात की और कुछ गिफ्ट खरीदने की चाह से योजना बनाई कि वह एक घंटे बाद घर से 12 कि.मी. दूर वाले थोक मार्केट से खरीददारी करने चली जायेगी। मेरी धड़कने बढ़ गई। और सुजाता ? उत्तर मिला वह घर पर रहेगी और दोपहर का भोजन तैयार रखेगी। मुझे तो मित्र के घर जाना ही था।</p>
<p>साढ़े नौ बजे मेरी पत्नी, मेरा बेटा और मेरी बहन तीनों आटो रिक्शे में चल दिये, मैं भी उन्हें जाने को तैयार दिखा। तीनों के घर से निकलते ही मैं उतावला हो गया। अन्दर किचन में जाकर पूछा- सुजाता, मैं निकल रहा हूँ चाय मिलेगी ?</p>
<p>वह पलट कर मोहक मुस्कान से बोली- क्यों नहीं जीजू ! जो चाहोगे वही मिलेगा .. मैं तो एक्सपर्ट हूँ &#8230; लेकिन आप भी चले जाओगे तो मैं तो यहाँ अकेली रह जाउंगी।</p>
<p>मैने कहा- चलो कुछ देर रूक जाता हूँ ! शीनू (बेटा) उठा नहीं ?</p>
<p>बोली- सोने दो न उसे जीजाजी ..वह उठ जायेगा तो आपसे बात भी नहीं कर पाउंगी। अपनी बात अभी हुई ही कहाँ है ?</p>
<p>मैंने उसके कन्धे पर हाथ रख दिया- हाँ.. ठीक कह रही हो।</p>
<p>मैं उसके और नज़दीक़ आ गया और दोनों हाथ दोनों कन्धों पर रख दिये। वह चाय बनाना छोड़ कर थोड़ा पीछे खिसक आई और मुझसे लगभग चिपक सी गई। मेरा हाथ बढ़ कर उसकी हथेलियों तक पहुंच गया, वे परस्पर मिली और एक हो गई। मुझे उत्तेजना बढ़ने लगी। मैने अपना चेहरा उसके कधे पर रख दिया वह तुरंत पलट कर मुझसे चिपक गई। मैंने उसे चूम लिया।</p>
<p>&#8220;कितनी प्यारी लग रही हो.. लगता है बहुत ही हल्की हो तुम.. &#8221;</p>
<p>&#8220;उठा कर देखो कितनी हल्की हूँ मैं !&#8221;</p>
<p>संकेत बहुत ही उत्तेजक था। मुझसे रहा नहीं गया, मैंने उसे सामने से थाम लिया और थोड़ा उठा लिया। उत्तेजना बढ़ी तो चुहल का स्तर बढ़ाने का अनैतिक ख्याल आया। मैने उसे उतार दिया और कहा &#8220;फिर से ठीक से उठाता हूँ तुम बहुत ही हल्की हो ।&#8221;</p>
<p>उसने कहा &#8220;ठीक है ।&#8221;</p>
<p>मैंने अबकी बार बहुत झुक कर उसकी साड़ी के नीचे से पिन्डली पर हाथ रख उस पर हाथ फिसलाते हुए उठाया। हाथ साड़ी के अन्दर ही अन्दर उसकी चिकनी जंघा से फिसलता हुआ उसके नितम्ब तक पहुंच गया।</p>
<p>सिहरन हुई क्योंकि वह पेंटी वगैरह कुछ नहीं पहने थी।</p>
<p>वह भी चिहुंकी,&#8221;क्या करते हो जीजू .. आप बड़े वो हो !&#8221;</p>
<p>मैंने क्या किया?</p>
<p>आपने मेरी साड़ी पीछे से बिल्कुल उठा दी थी !</p>
<p>मैंने कहा,&#8221;चलो बदला ले लो, तुम भी मुझे इसी तरह उठा लो .. &#8221;</p>
<p>वह बोली,&#8221;ऐसे तो नहीं उठा पाउंगी !&#8221;</p>
<p>मैंने पूछा,&#8221;फिर ?&#8221;</p>
<p><strong>Jija saali sex stories &#8211; <a class="yoast-link-suggestion__value" href="https://freehindisexstories.net/daaru-aur-choot-ka-maza/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">दारू और चूत का मजा</a></strong></p>
<p>उसने कहा,&#8221;मेरी स्टाइल से !&#8221;</p>
<p>मैने कहा,&#8221; ठीक है ! जैसी तुम्हारी मर्ज़ी !&#8221;</p>
<p>उसने मेरी दोनों टांगों के बीच अपने दोनों हाथों की पालकी बनाई और उठाने की कोशिश जैसे करने लगी। मैं पतला पायज़ामा पहने था और उसके नाज़ुक हाथ मेरे इलेक्ट्रोड को सहला से रहे थे। देर तक ऐसे ही कोशिश सी करती रही फिर बोली- आप भारी हो ! मुझसे नहीं बनता, आप ही उठाओ।</p>
<p>मैंने कहा- मैं भी ऐसे ही उठाता हूँ ! और अपने दोनों हाथों की पालकी बना कर उसकी दोनों टांगों के बीच में डाल दिये। आगे रतिमुख तक मेरा हाथ छू गया। वहाँ बालों का अहसास हुआ।</p>
<p>तेज़ सांसों के बीच मैने पूछा- क्यों सुजी ये बाल इतने क्यों बढ़ा रखे हैं?</p>
<p>सुजाता का चेहरा शर्म से लाल हो गया और बोली,&#8221; जीजू ! मैं आपको जान से मार दूंगी !</p>
<p>तेरे बाल साफ कर दूँ ? हेयर रिमूवर से ? (मैं अब तू पर आ गया था )</p>
<p>बोली- आप बहुत बदमाश हो जिज्जू ! ठीक है ! कहाँ करोगे ?</p>
<p>मैने कहा- मेरे बेडरूम में !</p>
<p>बोली- ठीक है, लेकिन ज़ल्दी करना।</p>
<p>मैंने उसे थामा और लगभग गोद में उठाते हुए अपने कमरे में ले गया।</p>
<p>मैं बोला- ज़ल्दी क्या है .. अभी तेरी दीदी नहीं आने वाली.. देर लगाती है वह तो.. !</p>
<p>उसके कपड़े ऊपर उठाने में अब दोनों में से किसी को संकोच नहीं हुआ।</p>
<p>मैंने कहा- तू मेरे भी साफ कर देना यार !</p>
<p>वह बोली- क्यों ! दीदी नहीं करती है ? कितने बढ़ चुके हैं? दिखाओ तो ज़रा !</p>
<p>मैंने अब तक उसे पूरा उघाड़ दिया था।</p>
<p>मैंने कहा- तू खुद खोल कर देख ले..हेयर रिमूवर हाथ में लिये मैं सामने खड़ा था, उसने कहा- नहीं, आप ही दिखा दो..</p>
<p>मैं धीरे-धीरे निर्वस्त्र हो गया, उसने कहा- ठीक तो है&#8230; हेयर रिमूवर की ज़रूरत नहीं ! रख दो.. !</p>
<p>मैं उसकी सहस्त्रधारा को सहलाने लगा .. उसने झटके से उठ कर मुझे चूम लिया। और पीछे से हाथ डाल खींच लिया। मै उसके ऊपर लुढ़क गया उसके हाथ मेरे लिंग को सहला रहे थे जिसे मैं अपना राजकुमार कहता हूँ।</p>
<p>मैंने कहा- तेरी राजकुमारी तो बडी प्यारी है !</p>
<p>उसने कहा- तेरा राजकुमार भी तो ! &#8230; बांका.. ! गबरू !!</p>
<p>अब वह भी &#8220;तू&#8221; पर आ गई थी।</p>
<p>मैंने कहा- दोनों की दोस्ती करवा दें ?</p>
<p>वह बोली- ज़ल्दी करवाओ .. राजकुमारी बैचैन है..</p>
<p>मैंने कहा- रुको ! राजकुमार सेहरा बांध कर आयेगा !</p>
<p>और सिरहाने की ड्रावर में से मूड्स कंडोम निकाला और चढ़ा लिया। सेहरे में राजकुमार को देख राजकुमारी ने अपने किले के द्वार खोल दिये। और राजकुमार ने अन्दर जा हलचल मचा दी। कुछ ही पल में हमारे सारे वस्त्र कमरे में यहाँ-वहाँ बिखर गये।</p>
<p>इतनी आज़ादी दोनों को शायद ही कभी मिली हो।</p>
<p>दोनों गुत्थमगुत्था .. पुराने प्रेमी पहलवानों की तरह&#8230; पूरी शैया पर लोटते रहे.. रात ही हस्तमैथुन किया था बल्कि दो बार किया था तो अभी की मिलन-क्रिया का कोई छोर ही नहीं आ रहा था। राजकुमार ज़बर्दस्त तना हुआ था। मुझे संतोष हुआ कि रात के कर्म से हानि के बज़ाय सुख में बढ़ोत्तरी ही हुई है। लगभग 35 मिनट की लम्बी सुखदाई मस्ती के दौरान हम चूत, लंड, भोसड़ी, चुदाई जैसे वर्जित शब्द उच्चारते रहे और जितना एक दूसरे को काट खा सकते थे, काटा खाया। जितना अन्दर उथल पुथल मचा सकते थे, मचाई।<br />
वह मेरे ऊपर बैठी भी और अपनी चूत की भीतरी मालिश/पालिश करती रही।</p>
<p>मैने उसे औरत, घोड़ी, कुतिया, नागिन सभी कुछ बना डाला। लगभग 35 मिनट बाद मेरा रस निकला .. देर तक निकलता रहा .. दोनों सराबोर हो गये.. कंडोम काफी भारी हो गया। उसने चिपके हुए ही मेरी पीठ ठोंकी .. मैं भी देर तक उसे चूमता रहा। फिर हम प्रेम से एक दूसरे की ओर देखते हुए नहाने के लिये उठे।</p>
<p>मैंने अपनी पत्नी को फोन करके पूछा- खाना बन गया क्या ?</p>
<p>वह बोली- आप घर पहुंच जाना ! मै सुजाता को फोन कर देती हूँ, वह आपको खाना खिला देगी। हमें अभी देर लगेगी क्योंकि अब हम सुरुचि नगर में चाची को देख कर ही आयेंगे।</p>
<p>तभी सुजाता के मोबाइल पर भी फोन आया कि जीजाजी आ जायें तो खाना खिला देना ! अभी शायद आने में दो घंटे लग सकते हैं।</p>
<p>सुजाता फिर भी बोली- अरे दीदी, मुझे तो किचन में छिपकली का डर लग रहा है, मैं तो टीवी ही देखती रही। अब जीजाजी के आने के बाद ही खाना बनाउंगी।</p>
<p>पत्नी ने सहमति दे दी। इस वार्तालाप से हम दोनों गद-गद हो गये। अब इत्मीनान से नहा धो खा सकते हैं और लाड-प्यार कर सकते हैं।</p>
<p>हम दोनों अलफ नंगे बाथ रूम में साथ नहाए ! खुद कोई नहीं नहाया। एक दूसरे को ही नहलाते रहे। राजकुमार और राज कुमारी को भी किस कराते हुए शावर दिया। एक दूसरे के अंगों पर भरपूर लाड़ किया, अन्दर तक सफाई की गुलाब, नीबूं वगैरह निचोड़ कर खुशबू से तर-बतर हो कर एक दूसरे को नहलाया, यूं ही निर्वस्त्र बाहर आये और चिपके चिपके बेडरूम मे कपड़े पहनने पहुंचे।</p>
<p>मैने कहा- तुम मुझे ठीक से पौंछ दो !</p>
<p>वह लगी मुझे पोंछने .. मैं भी दूसरे तौलिये से उसे पोंछ्ने लगा। हमारे गुप्तांग अब एक दूसरे की सम्पत्ति हो चुके थे। हमने अपनी अपनी सम्पत्ति को भली प्रकार पोंछा।</p>
<p>फिर मैंने कहा- इस पर तेल भी लगा दो.. फिर परस्पर तेल लगाने में फिर से उत्तेजित होने लगे..</p>
<p>वह बोली- जीजू .. अबकी बार बिना कंडोम के..</p>
<p>मैं उसकी बात टाल नहीं सका। अबकी बार सीढ़ी पर खड़े होकर देर तक लता और पेड़ की तरह एक हो गये। फिर से हमें 20 मिनट लगे। इस बीच हमने आइने के सामने अपने आपको मस्ताते हुए प्रकृति में समाते हुए देखा।</p>
<p>इस बार भी लिंग भरपूर चुस्त और कड़क था। सुजाता पहले से अधिक मुलायम और रेशम रेशम थी। अबकी बार मैंने उसे अपने ऊपर लिटा लिया और उसे क्रिया करने को उकसाया। उसे बहुत मज़ा आ रहा था।</p>
<p>अपनी उत्तेजना की चरम अवस्था में मुझसे बोली- जीजू याद रखना ! मैने तुझे चोद दिया है।</p>
<p>मैंने कहा- हाँ सुजी .. हमेशा याद रखूंगा कि तू जीती ..।</p>
<p>बोली- जीजू ! एक बार बोल कि मैं सुजी से चुदवा रहा हूँ।</p>
<p>मैंने सुर में सुर मिलाया .. हाँ सुजी .. मैं चुद गया .. तू मेरा रस ले जा..</p>
<p>वो बोली- तू भी मेरा ले..</p>
<p>और हम दोनों पल भर में उत्तेजना के चरम क्षण भोगकर फिर एक बार निढाल हो गये।</p>
<p>मैंने उतर कर कपड़े पहने शू, टाई व पसन्दीदा सेंट से सज्जित हो ड्राइंग रूम मे आगंतुक की तरह बैठ गया। और.. वह भी परी सी सज़ गई और गुनगुनाते हुए किचन में व्यस्त हो गई।</p>
<p>यह घटनाक्रम अनूठा था और अविस्मरणीय भी।</p>
<p>हैरानी मुझे अब यह हो रही थी कि उसका नन्हा बालक इतनी देर तक सोता रहा।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>आखिर चुद ही गई नखरीली साली</title>
		<link>https://freehindisexstories.net/aakhir-chud-gayi-nakhrili-saali/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[देसी बहु]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 11 Aug 2019 16:02:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीजा - साली]]></category>
		<category><![CDATA[antarvasna]]></category>
		<category><![CDATA[biwi ki chudai]]></category>
		<category><![CDATA[chachi ki chudai]]></category>
		<category><![CDATA[hindi chudai kahani]]></category>
		<category><![CDATA[hindi sex stories]]></category>
		<category><![CDATA[jija saali sex stories]]></category>
		<category><![CDATA[Saali ki chudai]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मेरा नाम सचिन है, मैंने अन्तर्वासना पर बहुत सी कहानियाँ पढ़ीं और मज़ा लिया तो सोचा कि अपनी भी एक कहानी मैं लिख दूँ। मेरी उम्र 34 साल है, मैं घर का अकेला पुरुष हूँ। ... <a title="आखिर चुद ही गई नखरीली साली" class="read-more" href="https://freehindisexstories.net/aakhir-chud-gayi-nakhrili-saali/" aria-label="Read more about आखिर चुद ही गई नखरीली साली">(कहानी पढ़िए)</a></p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मेरा नाम सचिन है, मैंने अन्तर्वासना पर बहुत सी कहानियाँ पढ़ीं और मज़ा लिया तो सोचा कि अपनी भी एक कहानी मैं लिख दूँ। मेरी उम्र 34 साल है, मैं घर का अकेला पुरुष हूँ। मेरी शादी हो गई है और भगवान ने मुझे तीन सालियाँ दी हैं। मेरी तीनों सालियों की उम्र क्रमशः 22, 21, 19 वर्ष है।</p>
<p>दूसरे नम्बर वाली गजब का माल है, पर वो मेरे हाथ नहीं आई इसलिए मैंने पहले नम्बर वाली सोनू को लाइन मारना शुरू किया, वो भी एकदम अनछुई कली थी।</p>
<p>मेरी पत्नी की डेलिवरी के लिए मैं उसे गाँव से अपने घर मुंबई ले आया।</p>
<p>मैंने सोचा कि यहाँ बीवी की मदद भी हो जाएगी और शायद मेरा काम भी बन जाए।</p>
<p>तीन महीने में हम सब सामान्यत: रहने लगे।</p>
<p><strong>Antarvasna Saali ki chudai &#8211; <a class="yoast-link-suggestion__value" href="https://freehindisexstories.net/jija-ne-chat-par-choda/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">जीजू ने आधी रात में छत पर चोदा</a></strong></p>
<p>धीरे-धीरे मैंने उस सोनू पर हाथ लगाना शुरू कर दिया, वो भी कुछ नहीं बोलती थी, मज़ाक-मज़ाक में मैं उसके मम्मों को दबा देता, तो वो भाग कर चली जाती।</p>
<p>घर पर हमेशा कोई ना कोई रहता था, इसलिए भरपूर मौका नहीं मिल पा रहा था।</p>
<p>इस तरह से चार महीने बीत गए।</p>
<p>दिन ब दिन वो खूबसूरत और मादक होती जा रही थी।</p>
<p>मेरा हाल बुरा था.. पता नहीं कितनी बार उसके नाम की मूठ मार चुका था। आखिरकार फिर वो दिन आ ही गया, जिसका मुझे इंतजार था।</p>
<p>मेरी पत्नी को मैंने डलिवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कर दिया।</p>
<p>मुझे मालूम था कि अस्पताल से 2-3 दिन बाद ही मेरी बीवी घर आएगी, चौका मारना है तो यही मौका है।</p>
<p>उस रात घर में पिताजी, मैं और साली ही थे। माँ को मैंने अस्पताल में बीवी के पास रहने को कहा।</p>
<p>पिताजी को काम पर जाना था, इसलिए हाल का टीवी बंद कर दिया।</p>
<p>मैंने जानबूझ कर मेरे कमरे का टीवी चालू रख दिया। मेरी साली सोनू थोड़ी देर बाद मेरे कमरे में ही आ गई।</p>
<p>मैं बहुत खुश हो गया, मैंने लाइट बंद कर दी और दोनों बिस्तर पर बैठ कर टीवी देखने लगे।</p>
<p>फिर सोनू लेट कर टीवी देखने लगी।</p>
<p>कुछ देर बाद वो सो गई या नाटक कर रही थी मुझे पता नहीं..</p>
<p>मेरे पास ये पता करने का एक रास्ता था, मैं भी उसके बगल में लेट गया, उसकी पीठ मेरी तरफ़ थी, मैं धीरे-धीरे उससे चिपक गया।</p>
<p>मैंने अपना हाथ उसके मम्मों पर रख दिया, फिर एक पैर उसके चूतड़ों पर रख दिया, मेरा लण्ड उसकी गाण्ड की दरार में चिपक गया।</p>
<p>धीरे-धीरे मैं उसके मम्मों को दबाने लगा।</p>
<p>फिर अपना हाथ उसके कुरते के अन्दर डाल दिया और उसके मदमस्त कबूतर दबाने लगा।</p>
<p>उसकी तरफ़ से कोई विरोध या प्रतिक्रिया नहीं आ रही थी।</p>
<p>मैंने अपना काम और ज़ोर से शुरू कर दिया, उसके दोनों मम्मों की मालिश शुरू कर दी, मुझे पता था कि अगर यह एक बार गर्म हो जाए, तो इसको पेलने में आसानी होगी।</p>
<p><strong>Antarvasna Saali ki chudai &#8211; <a class="yoast-link-suggestion__value" href="https://freehindisexstories.net/bade-bhai-ne-ki-chudai/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">बड़े भाई की मैं लुगाई</a></strong></p>
<p>मैंने उसे अब सीधा कर दिया और उसके ऊपर आकर उसके मम्मों को चूसने लगा, बहुत सारी जगह चुम्बन किए।</p>
<p>मुझे पता था कि अब वो जाग चुकी है और मजा ले रही है।</p>
<p>मैंने सोचा चलो ‘ट्वेंटी-ट्वेंटी’ खेल लेते हैं, मैंने उसका नाड़ा खोल दिया और उसकी चूत सहलाने लगा।</p>
<p>उसकी योनि पर मुलायम बाल थे, पर फिर भी योनि एकदम चिकनी थी।</p>
<p>मेरा जिस्म अब कांपने लगा था, मैंने अपना काम और ज़ोर से चालू कर दिया।</p>
<p>अब अकेले मैं ये काम करना नहीं चाहता था, मैंने उसकी चूत के छेद में ऊँगली डालने की कोशिश की, उसमें मुझे गीलापन मिला।</p>
<p>मैं समझ गया कि अब रास्ता साफ़ है।</p>
<p>यह साली सोनू जाग रही है और मज़ा ले रही है।</p>
<p>मैं अपना लण्ड उसकी चूत पर रख कर रगड़ने लगा।</p>
<p>उसकी साँसें और तेज हो गई थीं।</p>
<p>मैं खुश था कि आज फिर कुँवारी चूत मिलेगी।</p>
<p>मेरे लण्ड से भी पानी आ रहा था।</p>
<p>बस अब उसकी चूत चोदना बाकी रह गया था।</p>
<p>अचानक वो बोली- ये क्या कर रहे हो… ऐसा मत करो…</p>
<p>वो ज़ोर-ज़ोर से बोलने लगी।</p>
<p><strong>Antarvasna Biwi ki chudai &#8211; <a class="yoast-link-suggestion__value" href="https://freehindisexstories.net/mast-bhabhi-ki-samuhik-chudai/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">मस्त भाभी और सामूहिक चुदाई</a></strong></p>
<p>मैंने जबरन उसे चोदना चाहा, पर वो ज़रा भी घुसाने नहीं दे रही थी। थोड़ी देर की कुश्ती के बाद मुझे उसे छोड़ना पड़ा।</p>
<p>वो बहुत नाराज़ लग रही थी। शायद पहली बार किसी ने उसे इतना रगड़ा था और वो डर भी गई थी।</p>
<p>पिताजी भी दूसरे कमरे में आ चुके थे इसलिए मैं उससे ज्यादा बहस नहीं कर सकता था।</p>
<p>वो नाराज़ हो कर लेट गई।</p>
<p>मैं भी अब डर गया कि अब क्या होगा?</p>
<p>रात भर मैं और शायद वो भी सो नहीं पाई।</p>
<p>अगली सुबह क्या होगा पता नहीं, मेरी तो फट रही थी। मैं उसे चोद देता तो शायद वो किसी से नहीं बताती, पर अब सब फेल हो गया था।</p>
<p>मैंने डर के मारे आज मूठ भी नहीं मारी और सुबह के बारे में सोचने लगा। सुबह मैंने उसे फिर पकड़ लिया और उसके मम्मों को दबाना शुरू किया, इस बार भी वो कुछ नहीं बोली।</p>
<p>ऊपर-ऊपर से मैंने उसे बहुत गर्म किया, पर चूत में डलाने पर इस बार भी फिर वही गुस्सा।</p>
<p>मैंने उसे बहुत मनाया, पर वो नहीं मानी और कहा कि वो ये सब दीदी को बता देगी।</p>
<p>मेरी फिर फट गई, मैं समझ नहीं पाया कि वो चाहती क्या है?</p>
<p>दोस्तों मेरी यह कहानी सौ फ़ीसदी सच है और ये आप अन्तर्वासना पर पढ़ रहे हैं। करीब 15 दिन बाद मुझे फिर मौका मिला।</p>
<p>अबकी बार मैंने सोच लिया था कि साली को आज नहीं छोडूंगा और मैंने उसे अकेले में मौका पाकर पकड़ लिया।</p>
<p>उसने फिर मुझसे कुछ नहीं कहा, आज घर में कोई नहीं था।</p>
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<p>मैंने उसको कहा चल तू देती तो है नहीं… आज मेरे साथ पार्टी कर ले।</p>
<p>वो बोली- कैसी पार्टी?</p>
<p>मैंने उससे कहा- आज हम लोग कहीं बाहर चलते हैं और बाहर ही खाना खायेंगे।</p>
<p>वो राजी हो गई।</p>
<p>मैं उसे लेकर एक होटल में गया और उससे पूछा- बीयर तो चल जाएगी।</p>
<p>उसने ‘हाँ’ में सर हिला दिया मैंने वेटर को तेज वाली बीयर लाने को कहा।</p>
<p>कुछ देर बाद उसको नशा सा चढ़ने लगा। वो बोली- जीजू.. मुझे सहारा दो मुझे चक्कर से आ रहे हैं।</p>
<p>मैंने वेटर को बुलाया और एक कमरा देने के लिए कहा।</p>
<p>उसने मुझे तुरन्त एक कमरा दे दिया।</p>
<p>मैंने उसे कमरे में ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया और अपने पूरे कपड़े उतार दिए।</p>
<p>फिर मैंने उसकी तरफ देखा, वो मुस्कुरा रही थी।</p>
<p>मैंने उसकी आँखों की भाषा को समझ लिया और उसको सहारा देकर उठाया और अपने सीने से लगा लिया।</p>
<p>वो मुझसे आज चिपक गई मैं उसकी इस हरकत से चकरघिन्नी था।</p>
<p>मैंने सर को झटकाया और सोचा… माँ चुदाए.. मुझे क्या पर आज साली की चूत तो फाड़ कर रहूँगा।</p>
<p>मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए।</p>
<p>हाय क्या कबूतर थे।</p>
<p>साली को पूरी नंगी देख कर मेरा लवड़ा नब्बे डिग्री पर खड़ा हो गया था मैंने उसके मम्मों को अपनी मुठ्ठियों में भरा।</p>
<p>वो कराही- क्या उखाड़ डालना है इनको?</p>
<p><strong>Antarvasna Biwi ki chudai &#8211; <a class="yoast-link-suggestion__value" href="https://freehindisexstories.net/padoswali-bhabhi-ki-rasili-chut/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">पडोसवाली भाभी की रसीली चूत</a></strong></p>
<p>मैंने आज देर करना उचित नहीं समझा और उसको बिस्तर पर धक्का दिया और उसके ऊपर चढ़ गया।</p>
<p>लौड़े को चूत के मुहाने पर सैट किया और अपना मुँह उसके मुँह पर रखा। सब कुछ सैट होने के बाद मैंने उसकी चूत में लवड़ा सरका दिया।</p>
<p>वो कुछ चीखने को हुई पर मैंने मुँह पहले से ही ढक्कन जैसे लगा रखा था।</p>
<p>कुछ छटपटाने के बाद लौड़ा चूत में सैट हो ही गया।</p>
<p>उसकी चूत ने भी पानी छोड़ दिया था, लौड़े ने सटासट चुदाई आरम्भ कर दी।</p>
<p>करीब दस मिनट में ही साली अकड़ गई और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।</p>
<p>कुछ ताबड़तोड़ धक्के मार कर मैं भी उसकी चूत में ही झड़ गया।</p>
<p>सोनू चुद चुकी थी। अब वो मेरे लौड़े की पक्की जुगाड़ बन चुकी थी।</p>
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