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	<title>chuth Archives - Hindi Sex stories</title>
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	<title>chuth Archives - Hindi Sex stories</title>
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		<title>दारु के चक्कर में मिली चूत और बढ़ा कारोबार</title>
		<link>https://freehindisexstories.net/daru-ke-chakkar-me-mili-chooth/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[देसी बहु]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 20 Oct 2021 07:53:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>मैंने उसका ब्रा पकड़ा और फाड़ दिया &#124; उसके बाद क्या था मैंने उसके दूध को इस कदर चूसा और वो मज़ा से सिस्कारियां ले रही थी &#124; उसकी हालत ऐसी थी जैसे उसे कोई सुहागरात पे चोद रहा हो &#124; मैंने उसके निप्पल दबा दबा के चूसे और फिर वो एकदम लाल हो गए थे और कड़क भी...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>Chooth chudai ki kahani &#8211; हेल्लो दोस्तों चूत का दस्तूर ही कुछ ऐसा है ये जिस भी लंड को लेती लेती है उसे अपना बना लेती है | मैं हूँ जम्मन और मेरा कंचनपुर में दारु का काम चलता है | ऐसे तो वह पे कई सारे लोग दारु बेचते है पर एक औरत है जिसका नाम है साधना | क्या कटीला फिगर है उसका लोग उसके यहाँ से दारु इसलिए लेने जले है क्यूंकि उसका बदन मस्त है और वो हमेशा कम कपडे पहनती है | मेरा धंधा भी अच्छा चल रहा था पर जबसे वो आ गयी है लोग उसके यहाँ से ख़राब दारु भी ले लेते है | एक दिन मैंने सोचा साली के यहाँ छापा पडवा देता हूँ पर फिर लगा यार एक बार देख तो लिया जाए है कौन ये साधना |</p>
<p>फिर मैं उसके यहाँ गया एक ग्राहक बनके और उससे कहा मुझे एक बोतल दारु चाहिए | वो लेकर आई तो मैंने देखा उसने साडी पहनी थी और उसका पल्लू बिलकुल खुला था | क्या कसे हुए दूध थे उसके | और जब वो झुकी कुछ उठाने के लिए तो उसकी गांड साडी के ऊपर से ही समझ में आ रही थी | मैंने बोला यार ये तो बड़ा सामान है इसको तो हक बनता है महंगी दारु बेचने का | मैंने सोच लिया था की इसको तो चोद के रहूँगा और इसको अपने धंदे का भागीदार भी बनाऊंगा | मैं रोज़ उसके यहाँ जाने लगा दारु लेने और वहीँ बैठ कर पीता था | उसके बाद उसने मुझसे कहा तुम न अन्दर मेरे कमरे में बैठ कर पी लिया करो यहाँ पर कई सारे लोग आते हैं तो अच्छा नहीं लगता | मैंने कहा ठीक है जैसा आप बोलो मुझे तो बस पीने से मतलब है | फिर अन्दर जब मैं पहुंचा तो देखा उसने अपना घर किसी महल से कम नहीं बना रखा था |</p>
<p>पैसा तो बहुत कमाया था उसने इस काम से इसमें कोई दोमट नहीं है और मुझे भी लग रहा था इसके साथ कम करके मज़ा आएगा | फिर मेरा ये रोज़ का हो गया अब तो वो खुद मेरे लिए पानी और खाने के लये ले आती थी और उसके पैसे भी नहीं लेती थी | फिर एक दिन मैं वह पहुंचा और मेरे साथ ही कड़ी थी और मुझसे बात कर रही थी उतने में मेरा एक ग्राहक आया और उसने दारु मांगी | मुझे पता था अगर इसने मुझे देख लिया तो ये सब कुछ बक देगा यहीं पर | तो मैंने अपना मुह घुमा लिया पर वो साला मेरे सामने आया और कहा अरे जम्मन भाई आप तो खुद दारु बेचते हो यहाँ से क्यों ले रहे हो | मैंने उससे इशारे में कहा अबे मादरचोद निकल यहाँ से पर शराबी तो शराबी | तब साधना वहाँ पर नहीं थी पर वो यही बोलता रहा और उतने में वो आ गयी और उसने सब सुन लिया | उसने कुछ नहीं कहा और कहा ए बेवडे चल निकल यहाँ से ये मेरा ख़ास ग्राहक है | मुझे लगा सब ठीक है और में अन्दर चला गया |</p>
<p>इस बार चीज़े थोड़ी सी अलग थीं क्यूंकि पहले वो बड़े प्यार से हस्ते हुए खाने के लिए लाती थी और दारु भी खुद ही देती थी | पर इस बार उसने खाने के लिए दिया तो पर बड़े अजीब तरीके से | वो आई और सीधा रख दिया और कहा जो लगे मेरा नौकर अन्दर है आवाज़ लगा देना | मैंने भी कहा ठीक है क्यूंकि उस समय वो गुस्से में थी और मैं कोई भी चांस नहीं लेना चाहता था | मैंने उससे बात करने की कोशिश की पर वो मुह घुमा के चली जाती थी | ऐसे ही तीन चार दिन निकल गए और मैंने उससे बात नहीं की और वो भी गुस्सा ही रहती थी |</p>
<p>एक हफ्ते बाद मेरे सब्र का बाँध तिऊत गया और मैंने उसका हाथ पकड़ लिया | उसने कहा “जम्मन छोड़ मेरा हाथ नहीं थप्पड़ मार दूंगी” मैंने भी कहा नहीं आज तो पता करके ही रहूँगा कि आखिर बात क्या है | उसने नहीं कोई बात नहीं है तू बस जाने दे मुझे | मैंने कहा पति तेरा है नहीं और गुस्सा दिलाने वाला तुझे कोई पैदा नहीं हुआ | तो उसने कहा अगर हो गया होगा तो तू क्या कर लेगा ? तो मैंने कहा जान ले लूँगा साले की अगर किसी ने तुझे तंग किया तो | तो उसने कहा हाँ अच्छा है फिर तू खुद को ही मार डाल |</p>
<p>Chooth chudai <a href="https://freehindisexstories.net/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/" rel="bookmark">सैक्स – एक चुदाई कथा</a></p>
<p>मूझे समझ आ गया था कि आखिर माजरा क्या है ? उस दिन जो उस बेवडे ने कहा वो सीधा इसके दिल पे लगा और ये गुस्सा हो गई | साधना गयी और उसने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया और नौकर से कहा मैं सो रही हूँ कोई भी आए संभाल लेना | मैंने उसके नौकर को बुलाया और कहा छोटू ये ले पकड़ 500 का पत्ता और मुझे अन्दर जाने दे | उसने कहा ठीक है पर दरवाज़ा अन्दर से बंद है मैंने बोला तू वो सब जाने दे | उसने कहा ठीक है फिर वो चला गया | मैंने जाकर साहना को आवाज़ लगायी पर उसने कुछ जवाब नहीं दिया |</p>
<p>फिर मुझे हलकी सी आवाज़ आई उसके रोने की आवाज़ आई | मैंने साधना मुझे माफ़ करदे मैंने कुछ भी जानबूझ कर नहीं किया | उसने कहा पहली बार मुझे किसी से इतना लगाव हुआ था और उसी ने मेरा भरोसा तोड़ दिया | मैंने नहीं अगर भरोसा तोडना होता तो ममें यहाँ आता क्या | उसने कहा तूने मुझे बताया नहीं की तू भी वही काम करता है | तू यहाँ मुझे बर्बाद करने आया था करले मैं कुछ नहीं कहूँगी |</p>
<p>मैंने कहा साधना मैं यहाँ बस तुझे देखने आया था पर उजाने अनजाने में तुझसे प्यार हो गया | मैं अपने काम के बारे में तुझे बताने ही वाला था पर तूने सुन लिया | माफ़ करदे यार मेरे मन में कुछ भी गलत नहीं था और मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा कुछ हो जाएगा हमारे बीच में | फिर उसने दरवाज़ा खोला रोते हुए | मैंने उसे तुरंत ही गले लगा लिया और वो और सिसक सिसक के रोने लगी | मैंने उसे चुप कराया और उसको चूमने लगा | फिर कुछ देर बाद उसने मुझे देखा और कहा तू सच में प्यार करता है ना मुझसे | मैंने कहा हाँ मेरी माँ अब क्या अपना दिल चीर के दिखाऊ तुझे | उसने कहा वैसे ख्याल बुरा नहीं है | मैंने उसे और कस के गले लगा लिया और उसके बड़े बड़े दूध मुझे महसूस हो रहे थे | मेरा लंड भी धीरे धीरे खड़ा हो रहा था |</p>
<p>मैंने भी सोचा इससे अच्छा मौका मुझे नहीं मिलेगा और मैंने उसे जोर जोर से चूमना चालू कर दिया | फिर उसने मुझसे कहा ये क्या कर रहे हो जम्मन | मैंने कहा बस आज मत रोको | और उसको चूमते चूमते उसके दूध दबाने लगा | क्या कसे हुए और मुलायम दूध थे उसके | मैंने कहा अब इनको आज़ाद करदो और बस इतना ही इएहना था कि उसने अपना ब्लाउज खोल दिया | जैसे ही उसका काला ब्रा और उसमे कसे हुए दूध दिखे मैं तो हिल गया था | मैंने सोचा बस अब इससे बोल ही देता हूँ |</p>
<p>मैंने कहा अब मैं नहीं रुक सकता कल तेरे लिए नया ब्रा ला दूंगा | मैंने उसका ब्रा पकड़ा और फाड़ दिया | उसके बाद क्या था मैंने उसके दूध को इस कदर चूसा और वो मज़ा से सिस्कारियां ले रही थी | उसकी हालत ऐसी थी जैसे उसे कोई सुहागरात पे चोद रहा हो | मैंने उसके निप्पल दबा दबा के चूसे और फिर वो एकदम लाल हो गए थे और कड़क भी | मैं समझ गया था अब ये गरम हो चुकी है और मैंने उसकी साडी उतारी और उसने नीचे पेन्टी नहीं पहनी थी | मैंने उसकी चूत देखी और कहा इतनी शानदार फूली हुयी चूत | उसने कहा अभी तक इसे लंड नहीं मिला है इसे कस के चोदो |</p>
<p>मैंने अपना मुह उसके नीचे लगाया और उसकी चूत का पानी चाट के साफ कर दिया | फिर मैं उसकी चूत चाटने लगा और उसकी गलाबी की चूत को जमके चाटा | वो सिस्कारियां भर रही थी और उम्म्मम्म्म्मम्म्म्म आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊऊईईईईइमा उम्म्मम्म्म्मम्म्म्म आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊऊईईईईइमा कर रही थी और मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था | फिर मुझे भी रहा नहीं गया और मैंने कहा साधना अब तेरी चूत में मेरा लंड जा रहा है | उसने कहा हाब्न्न डाल दे |</p>
<p>Ye sex kahani padhiye <a href="https://freehindisexstories.net/sex-ki-sachi-kahani/" rel="bookmark">पहली चुदाई का नशा (अंतिम भाग)</a></p>
<p>मैंने जेसे ही लंड अन्दर डाला उसने फिर उम्म्मम्म्म्मम्म्म्म आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊऊईईईईइमा उम्म्मम्म्म्मम्म्म्म आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊऊईईईईइमा करना शुरू कर दिया | मुझे ये सब सुनके जोश आ गया और मैं उसे और तबियत से चोदने लगा | फिर उसके बाद मैंने उससे कहा अपनी गांड के छेद दिखा और मैंने उसके गांड के छेद को भी चोदा | आधे घंटे बाद मैंने उसके पूरे बदन पे अपना मुठ फैला दिया और वो उसे अपने पूरे बदन पे मल रही थी |</p>
<p>फिर वो नहाके बाहर आई मुझे गले लगाया और कहा अब से हम साथ में काम करेंगे और तू मुझे छोड़ के मत जाना | मैंने भी कहा कभी नहीं जाऊँगा बस चूत देती रहना और हम दोनों हसने लगे | दोस्तों मेरी ये कहानी आप लोगों को कैसी लगी कमेंट कर के जरुर बताइयेगा |</p>
<p>मुझे इंतजार रहेगा |</p>
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		<title>रुखसार बेगम की मचलती जवानी</title>
		<link>https://freehindisexstories.net/desi-bur-ki-jabardast-chudai-xxxx-story/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[देसी बहु]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 20 Oct 2021 07:47:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>उसने अपने कपडे भी फाड़ दिए और कहा इस नाचीज़ की चूत को खा जाओ &#124; मैंने उसकी चूत को मजबूरी में चाटा और उसके बाद जैसे ही उसने मुझे अपना माल पिलाया मुझे जोश आ गया &#124; उसके बाद मैंने उसे बिस्तर पे पटका और कहा बस अब आपको हमारे लंड की ताकत से रूबरू करवाता हूँ..</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आज का सबसे बड़ा सवाल यह है कि हम कैसे जियें? और उससे भी बड़ी समस्या यह है कि ऐसा क्या करें कि जीना असंभव हो जाये। दोस्तों, ये दो सवाल बहुत कठिन हैं क्योंकि पूरी जिंदगी इनके इर्द-गिर्द घूमती है और आज तक कोई भी इनसे बच नहीं पाया है।</p>
<p>मैं भी यही सोचता था कि अगर हर काम दिल से करो तो राह आसान हो जाती है। लेकिन इसके अलावा भी हमें कई चीजों की जरूरत होती है, जिससे हम सब कुछ कर सकते हैं। देखिए, एक लेखक समाज को आईना दिखाता है, लेकिन सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उसका खुद का जीवन अंधकार में होता है।</p>
<h5>Rukhsar begam ke desi bur ki jabardast chudai xxx ki antharvasna sex kahani</h5>
<p>एक लेखक बहुत मेहनत करके अपना गुजारा करता है, लेकिन अगर उसे कोई ऐसा मिल जाए जो उसकी कला की कद्र करे, तो उसका पूरा जीवन बेहतर हो जाता है। मैं भी कुछ ऐसी ही तलाश कर रहा था। घर पर मेरी पत्नी और बच्चे थे जो पढ़ाई कर रहे थे।</p>
<p>हमारे घर में आर्थिक तंगी बहुत थी क्योंकि मुझे हर दिन किसी न किसी से बेइज्जती का सामना करना पड़ता था। अगर किसी को कहानी पसंद नहीं आती थी, तो मुझे कोई नहीं मिलता था। लेकिन मेरी पत्नी और बच्चे मेरी ताकत थे क्योंकि वो हमेशा मेरी तारीफ करते थे और किसी तरह सब कुछ मैनेज कर लेते थे।</p>
<p>अगर आपके पास कोई सच्चा साथी हो, तो जिंदगी खूबसूरत हो जाती है और सफर बस नाम का रह जाता है। करीब 5 साल हो गए मुझे लोगों के चक्कर काटते काटते लेकिन एक पैसा नहीं मिला। लेकिन मेरा घर चलता था क्योंकि जहाँ भी कवि सम्मेलन या मुशायरा होता था।</p>
<p>पैसे कम मिलते थे लेकिन घर का चूल्हा जलता था और दो सेर रोटी भी मिल जाती थी। मैं आपके साथ एक घटना शेयर करना चाहता हूँ जो मेरे साथ भिंड में घटी। यह जगह मध्य प्रदेश में है और यहाँ के ज़्यादातर लोग अपराधी प्रवृति के थे।</p>
<p>यहाँ एक बहुत बड़ा कवि सम्मेलन होने वाला था जिसका आयोजन ठाकुर साहब कर रहे थे। ठाकुर साहब यानी सरकार जी। उन्होंने यहाँ राज किया। लेकिन उन्होंने किसी के साथ बुरा नहीं किया।</p>
<p>मुझे एक निमंत्रण मिला और उसमें एक हजार रुपए थे और लिखा था कि तुम्हें यहां आकर एक कविता सुनानी है। मैंने भी जल्दी से एक हजार रुपए भाग्यवान को दे दिए और मेरे बड़े बेटे गज्जू ने उससे कहा कि अरे गुड्डू, अम्मा का ख्याल रखना, ठीक है।</p>
<p>उसने कहा ठीक है बापू और फिर उसने मुझसे पूछा बापू एक दिन हम अच्छी जिंदगी जिएंगे ना? मेरी आंखें नम हो गईं और मैंने कहा डाल पर बैठे पंक्षी को अपने पंखों पर भरोसा होता है, लाख तूफान आएं, लेकिन अपने दिल में हिम्मत भर लो और फिर देखो क्या होता है।</p>
<p>उसने भी मुस्कुरा कर कहा ठीक है बापू अब आप जा सकते हैं।</p>
<p>Chodai ki kahani &#8211; <a href="https://freehindisexstories.net/chod-gaya-meri-gaand-re/" rel="bookmark">गांड में चोदा चोदी</a></p>
<p>मैं तैयार हुआ, अपना बैग लिया और अपने सफर पर निकल पड़ा। मुझे एक बस मिली और किराया था 30 रूपये। मैं भिंड पहुंचा और रात के 1 बज रहे थे। कुछ लोगों ने मुझे घेर लिया और कहा जो कुछ भी है निकाल लो। मैंने कहा खुद ही ले लो भाई और वो मेरी तरफ आने लगे।</p>
<p>जैसे ही उन्होंने मेरी तलाशी ली तो उनके पास एक पायजामा और कुर्ता और 50 रूपये और कुछ किताबें मिली। तो उनमें से एक ने मुझसे पूछा कि भिखारी तुम क्या कर रहे हो। तो मैंने कहा मैं एक लेखक मित्र हूं, तो वो सब दूर हट गए और मुझे गले लगा लिया और कहा मूर्ख अब मुझे रुलाओगे क्या।</p>
<p>अपना सामान उठाओ और बताओ कहां जाना है। देखा दोस्तों, एक लेखक की मजबूरी डाकू भी समझते हैं। लेकिन उस समय शायद उनमें से कोई कुछ लेने गया था और सबको कह गया था कि भाई को कहीं मत जाने देना।</p>
<p>थोड़ी देर बाद वो वापस आया और बोला भाई ये लो रोटियां हैं तुम जरूर खा लेना, तुम्हें भूख लगी होगी रोटी के साथ देशी शराब हो तो मजा आ जाता है। हम सब नशे में थे तभी उनमें से एक ने पूछा भाई तुम यहां किसके यहां आए हो तो मैंने उससे कहा कि मुझे ठाकुर साहब के कवि सम्मेलन में जाना है।</p>
<p>उसने कहा भाई चिंता मत करो हम तुम्हें सुबह छोड़ देंगे। और हम वहीं खाई में सो गए। फिर जब सुबह उठा तो मैं ठाकुर साहब की हवेली के बाहर मैदान में था। मैंने मन ही मन उनका धन्यवाद किया और सोचा कि काश वो मेरी कविता सुनने आते।</p>
<p>टेंट लग चुका था, मंच सजा हुआ था और कई मशहूर कवि और कवयित्रियां वहां आई हुई थीं। मैंने सोचा पहले नहा लूं फिर देखूं क्या इंतजाम है। मैं पास के नल के नीचे नहाया और सोचा नाश्ता कर लूं। लेकिन अगर मैं नाश्ता कर लेता तो मेरे पास घर जाने के लिए पैसे नहीं बचते इसलिए मैं भूखा ही रह गया।</p>
<p>लेकिन एक घंटे बाद वो सभी लोग वापस आए और बोले भाई हम आपके लिए नाश्ता लाए हैं। मैं उन्हें देखकर बहुत खुश हुआ और भगवान का शुक्रिया अदा किया। &#8220;लाख तकलीफें दे दो पर मुझसे वो दोस्त मत छीनो जो मेरा ख्याल रखते हैं।&#8221; फिर उन्होंने कहा भाई हम रात को मिलेंगे, अगर अभी रुके तो पुलिस हमें गिरफ्तार कर लेगी।</p>
<p>फिर मैं अंदर गया और जायजा लेने लगा।</p>
<p>अंदर जाते ही मेरी मुलाकात भारतेंदु दुखभंजन सिंह साहब से हुई जो हमारे समय के बहुत बड़े कवि थे। उन्होंने मुझे देखा और कहा तुम नए लग रहे हो और मैंने उनके पैर छुए और उनका आशीर्वाद लिया। मैंने ध्यान नहीं दिया कि एक युवा कवयित्री मेरी तरफ देख रही थी। वो एक राजघराने से ताल्लुक रखती थी।</p>
<p>उसका नाम रुखसार अंबर था और उसकी शायरी में वीरता और हास्य दोनों ही तत्व थे। फिर मैंने सोचा कि बेचैनी के बीच मेरा क्या काम है तो मैं चुपचाप एक कोने में खड़ा हो गया। तभी गलियारे में मौजूद लोगों की तरफ से एक आवाज आई और मुझे समझते देर नहीं लगी कि ये हमारे राहत फरूकाबादी हैं।</p>
<p>उन्होंने मेरी बात सुन ली थी और वो सबके लिए यहां आए थे। मेरी तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि अगर व्यंग्य और गंभीर शायरी का नाम आएगा तो ये लड़का बहुत ऊपर जाएगा। रुखसार अंबर भी वहां थी और वो ये सब बड़े ध्यान से सुन रही थी।</p>
<p>सबके जाने के बाद वो मेरे पास आई और बोली कि आप तो बड़े छुपे हुए योद्धा लगते हैं, क्या आप हमें अपना जादू नहीं दिखाएंगे। तो मैंने कहा कि रुखसार जी, चलिए अब मैं आपको एक चुटकुला सुनाता हूं। तो वो बोली नहीं, हम आपका जादू अकेले में देखना चाहते हैं।</p>
<p>मैं समझ गया कि वो क्या चाहती है।</p>
<p><a href="https://hindipornstories.org/">Antharvasna</a> &#8211; <a href="https://freehindisexstories.net/padoswali-bhabhi-ke-saath-suhagraat/" rel="bookmark">पड़ोसवाली भाभी के साथ सुहागरात मनाई</a></p>
<p>पहले तो मैंने सोचा कि चलो अपना काम निपटा लेते हैं और बाद में करेंगे। सम्मेलन शुरू हुआ और मेरी बारी आई और जैसे ही मैंने पहला व्यंग्य किया सभी कवि खड़े हो गये और तालियाँ बजाने लगे।</p>
<p>मैंने दो घंटे तक अपनी प्रस्तुति दी और ठाकुर साहब खुश हुए और मुझे एक लाख की नकद राशि दी। फिर रात को हमने वहीं पर खाना खाया लेकिन रुखसार मुझे एक कमरे में ले गई और बिना कुछ कहे मेरे कपड़े फाड़ दिए और अपने भी कपड़े उतार दिए।</p>
<p><a href="https://antarvasnasexkahani.net/maa-beta/lockdown-me-maa-sex-chat-aur-chudai/">मेरा लंड</a> बालों से भरा हुआ था लेकिन फिर भी वो उसे चूसने लगी और इतना चूसा कि वो लाल हो गया।</p>
<p>फिर उसने अपने कपड़े भी फाड़ दिये और बोली खा जा इस हरामजादी की चूत। मैंने बेबसी में उसकी चूत चाटी और उसके बाद जैसे ही उसने मुझे अपना रस पिलाया तो मैं उत्तेजित हो गया। उसके बाद मैंने उसे बिस्तर पर पटक दिया और कहा कि अब मैं तुझे हमारे लंड की ताकत से परिचित कराता हूँ।</p>
<p>उसके बाद मैंने उसे उल्टा कर दिया और अपना लंड उसकी गांड में डाल दिया और वो उम्म्मम्म्मम्म.. आआआआह.. ऊऊऊऊहह.., जैसी आवाज़े निकालने लगी।</p>
<p>बेगम जान की गांड फट चुकी थी और मैं उनको पागल घोड़ी की तरह चोद रहा था.</p>
<p>वो लगातार आह्ह&#8230;ओह्ह&#8230;ऊई&#8230;कर रही थी और मैं रुकने को तैयार नहीं था.</p>
<p>बीच बीच में मैं उनके चूतड़ों पर थप्पड़ मार रहा था. फिर मैंने अपना लंड उनकी गांड में डाला पर फिर भी मेरा लंड खड़ा था.</p>
<p>मैंने उनको घोड़ी की तरह खड़ा किया और इस बार उनकी चूत फाड़ दी और हर बार की तरह मैंने उनकी चूत में हस्तमैथुन किया.</p>
<p>उसके बाद हम साथ में लेट गए. वो मुझसे बहुत खुश हुई और उन्होंने मुझे अपना हार और दो किलो सोना दिया.</p>
<p>मैं फिर से उत्तेजित हो गया और उनको फिर से चोदा. इस बार वो आह्ह उम्म्मम्म्मम्म करती रही और पूरी रात चुदती रही.</p>
<p>इस बार मैं करोड़पति बनकर घर लौटा और ये मैं कभी नहीं भूलूंगा.</p>
<p>दोस्तों बहुत से लोग अमीर बन गए होंगे पर बहुत कम लोग मेरे जैसे बन पाएंगे. मु</p>
<p>झे जरूर बताइए कि आपको शायर की ये कहानी कैसी लगी.</p>
<p>The post <a href="https://freehindisexstories.net/desi-bur-ki-jabardast-chudai-xxxx-story/">रुखसार बेगम की मचलती जवानी</a> appeared first on <a href="https://freehindisexstories.net">Hindi Sex stories</a>.</p>
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